CG-कॉलेज बंद हुआ तो 68 इंजीनियरिंग छात्रों का भविष्य अधर में! CSVTU ने लिया बड़ा फैसला, 67 को CSIT और एक को RSR में भेजा

भिलाईनगर, 27 अगस्त 2026। युगांतर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी एंड मैनेजमेंट (YITM), राजनांदगांव के बंद होने के बाद वहां अध्ययनरत 68 BTech विद्यार्थियों के भविष्य पर मंडरा रहा संकट अब टल गया है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) ने सभी विद्यार्थियों का दूसरे तकनीकी संस्थानों में स्थानांतरण कर दिया है।
विश्वविद्यालय के फैसले के मुताबिक 67 विद्यार्थियों को छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CSIT), दुर्ग में प्रवेश दिया गया है, जबकि एक विद्यार्थी को RSR रुगंटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, भिलाई में स्थानांतरित किया गया है।
1 सितंबर तक लेना होगा नए कॉलेज में प्रवेश
CSVTU ने विद्यार्थियों को 1 सितंबर 2026 तक नए संस्थान में प्रवेश लेने के निर्देश दिए हैं। संबंधित कॉलेजों को विद्यार्थियों के प्रवेश की जानकारी विश्वविद्यालय को भेजने के साथ ट्रांसफर सर्टिफिकेट की छायाप्रति भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके बाद विद्यार्थियों के नए रोल नंबर जारी किए जाएंगे।
28 नियमित, 40 डिटेंड छात्र शामिल
स्थानांतरित किए गए 68 विद्यार्थियों में 28 नियमित और 40 डिटेंड श्रेणी के छात्र हैं। नियमित श्रेणी में तीसरे सेमेस्टर के 8, पांचवें सेमेस्टर के 11 और सातवें सेमेस्टर के 9 विद्यार्थी शामिल हैं। इन सभी को CSIT दुर्ग में प्रवेश दिया गया है।
वहीं डिटेंड श्रेणी में तीसरे सेमेस्टर के 2, पांचवें सेमेस्टर के 6, छठवें सेमेस्टर के 19 और सातवें सेमेस्टर के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें से लगभग सभी विद्यार्थियों को CSIT दुर्ग भेजा गया है। केवल तीसरे सेमेस्टर के एक विद्यार्थी को RSR रुगंटा कॉलेज, भिलाई में स्थानांतरित किया गया है।
परीक्षा को लेकर भी विश्वविद्यालय ने स्थिति की साफ
CSVTU ने विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। नियमित और डिटेंड दोनों श्रेणी के विद्यार्थियों को पहले सेमेस्टर परीक्षा की पात्रता पूरी करनी होगी। पात्रता पूरी होने के बाद ही उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की अनुमति मिलेगी।
कॉलेज बंद, लेकिन छात्रों की पढ़ाई नहीं रुकेगी
YITM के बंद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा और डिग्री की निरंतरता को लेकर थी। विश्वविद्यालय के इस फैसले से फिलहाल छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
अब नए संस्थानों में विद्यार्थियों के रिकॉर्ड ट्रांसफर, नए रोल नंबर, कक्षाओं और परीक्षा संबंधी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना संबंधित कॉलेजों की जिम्मेदारी होगी।
